यूएसबी में नहीं, डीएनए में सेव होगा डेटा

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माइक्रोबायोलॉजिस्ट नाथानियल रोक एक छोटी सी ट्यूब दिखाते हैं जिसमें एक किलोबाइट इनफॉर्मेशन बड़े आराम से आ जाती है. उन्होंने इसमें एक कविता की लाखों कॉपियां रखी हैं. वह बताते हैं, “अक्षरों के बीच की जगह में एक 8 बिट नंबर है. हम इसे डीएनए पर इनकोड करते हैं. हम शून्य और एक के बीच के स्ट्रिंग को AGCTA के स्ट्रिंग में बदलते हैं. हम एक सॉफ्टवेयर बना रहे हैं जिसमें यह मैपिंग होगी, वैसे हम असल में डीएनए बना रहे हैं.”

रिसर्चर इस सिस्टम के फायदों को लेकर उत्साहित हैं. रोक बताते हैं. “आप अथाह जानकारी एक छोटी सी जगह पर स्टोर कर सकते हैं. विश्वसनीयता की बात करें तो अगर आप डीएनए को फ्रीज करें तो यह बहुत ही लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा, शायद लाखों साल तक. इसीलिए हम एक हिमहाथी के जीनों की सिक्वेंसिंग कर सकते हैं जो 60 हजार साल से बर्फ में दबा है. डीएनए आसानी से कॉपी भी हो जाता है.”

फिलहाल, यह भविष्य की योजना है. अपनी रिसर्च की बदौलत दोनों ने एक बायोटेक स्टार्ट अप कंपनी खोली है. हर हफ्ते वे निवेशकों को बताते हैं कि काम कितना आगे बढ़ा है.

माइक्रोबायोलॉजिस्ट नाथानियल रोक एक छोटी सी ट्यूब दिखाते हैं जिसमें एक किलोबाइट इनफॉर्मेशन बड़े आराम से आ जाती है. उन्होंने इसमें एक कविता की लाखों कॉपियां रखी हैं. वह बताते हैं, “अक्षरों के बीच की जगह में एक 8 बिट नंबर है. हम इसे डीएनए पर इनकोड करते हैं. हम शून्य और एक के बीच के स्ट्रिंग को AGCTA के स्ट्रिंग में बदलते हैं. हम एक सॉफ्टवेयर बना रहे हैं जिसमें यह मैपिंग होगी, वैसे हम असल में डीएनए बना रहे हैं.”

रिसर्चर इस सिस्टम के फायदों को लेकर उत्साहित हैं. रोक बताते हैं. “आप अथाह जानकारी एक छोटी सी जगह पर स्टोर कर सकते हैं. विश्वसनीयता की बात करें तो अगर आप डीएनए को फ्रीज करें तो यह बहुत ही लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा, शायद लाखों साल तक. इसीलिए हम एक हिमहाथी के जीनों की सिक्वेंसिंग कर सकते हैं जो 60 हजार साल से बर्फ में दबा है. डीएनए आसानी से कॉपी भी हो जाता है.”

फिलहाल, यह भविष्य की योजना है. अपनी रिसर्च की बदौलत दोनों ने एक बायोटेक स्टार्ट अप कंपनी खोली है. हर हफ्ते वे निवेशकों को बताते हैं कि काम कितना आगे बढ़ा है.

ह्युनजुन पार्क को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वे पहले किलोबाइट को इनकोड कर चुके हैं. माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनी ने भले ही इससे ज्यादा डाटा स्टोर करने में सफलता पा ली हो, लेकिन इन युवा वैज्ञानिकों को लगता है कि वह तरीका बेहद महंगा साबित होगा, क्योंकि उसमें स्टोरेज मॉलिक्यूल स्टेप बाय स्टेप बनते हैं. उनके मुताबिक यह रूबिक क्यूब पर एक एक कर ब्लॉक रखने जैसा है.

नाथानियल रोक कहते हैं, “हमारा तरीका दूसरा है. हम पहले से तैयार डीएनए का समूह बनाते हैं. डीएनए जो अपने मूल रूप में भी मौजूद हैं. लेकिन ये अवस्था मायने नहीं रखती. फिर हम कॉम्बिनेशनल एन्जाइमैटिक रिएक्शंस करते हैं ताकि डीएनए उस मैसेज में बदल जाए, जिसे हम इनकोड करना चाह रहे हैं.”

ये तरीका बहुत सस्ता है, लेकिन फिलहाल उन्हें निवेशकों को भरोसा दिलाते रहना है कि यह डाटा स्टोरेज का सबसे क्रांतिकारी तरीका होगा.

 

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