तबादला एक्ट बना मंत्रियों के लिए मुसीबत, विभागों को एक्ट के दायरे से बाहर लाने की हो रही तैयारी

उत्तराखंड में इन दिनों ज्यादातर डिपार्टमेंट में ट्रांसफर चल रहे हैं। एक्ट के हिसाब से 10 जुलाई से पहले ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। लेकिन बीजेपी के कुछ विभागीय मंत्रियों को एक्ट से दिक्कत होती दिख रही है। जिसकारण वो विभागों को एक्ट के दायरे से बाहर रखने की हिदायत दे रहे हैं।

तबादला एक्ट है क्या?

तबादला एक्ट में सर्वप्रथम तबादलों के लिए समय सारिणी तैयार की गई है। जिसके तहत हर साल 31 मार्च तक प्रत्येक विभाग के विभागाध्यक्ष की ओर से कार्यस्थल का मानक के अनुसार चिह्नीकरण होना चाहिए। साथ ही 15 अप्रैल तक सुगम, दुर्गम क्षेत्र के कार्यस्थल, पात्र कर्मचारी और खाली पदों की संभावित सूची जारी होनी चाहिए। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों से 20 अप्रैल तक अनिवार्य तबादलों के लिए अधिकतम 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगे जाने चाहिए, जबकि पांच जून तक तबादला समिति की बैठक और 10 जून तक तबादलों के आदेश जारी हो जाने चाहिए।

तबादलों की मनमानी को रोकने के लिए बना एक्ट

उत्तराखंड में वर्ष 2017 में तबादलों की मनमानी पर रोक लगाने और तबादलों की पारदर्शिता के लिए तबादला एक्ट लागू किया गया था। एक्ट में वार्षिक तबादलों के लिए समय-सारणी तय है, इसके बावजूद कुछ विभागों ने तबादला एक्ट को दरकिनार कर पूरे साल तबादलों का सिलसिला जारी रखा।

अब एक्ट से बाहर निकलने पर मंत्री दे रहे तर्क

अब एक्ट के दायरे से बाहर निकालने के लिए प्रदेश के अटल उत्कृष्ट स्कूलों के शिक्षकों की सिफारिश मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति कर चुकी है। अब इन शिक्षकों के लिए अलग से नियमावली बननी प्रस्तावित है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को भी एक्ट के दायरे से बाहर रखने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं आवश्यक सेवाओं के अंतर्गत आती हैं। जिसमे चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ का स्थानांतरण जरूरत के अनुसार करना पड़ता है। जिसके लिए विभाग को एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।

वहीं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी बातों से साफ कर दिया है कि प्राविधिक शिक्षा और वन विभाग में अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यक्षमता के अनुसार तबादले होंगे। तबादला कर्मचारी की कार्यक्षमता के अनुसार तय होगा कि किसे कहां जाना है। और अंत में बन मंत्री स्पष्ट कर दिया कि इसमें एक्ट का भी ध्यान रखा जाएगा।

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