उत्तराखंड के पदक विजेता खिलाड़ियों को अब,  राज्य में ही मिलेगी सरकारी नौकरी   

 CM पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के खिलाडियों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया | जिसके अंतर्गत ऐसे खिलाडियों को शामिल किया जायेगा, जिन्होंने अपने बेहतरीन खेल प्रदर्शन से देश- विदेश में अपने बेहतर खेल प्रदर्शन से पदक हासिल करके  देश और राज्य का मान बढ़ाया हो | ऐसे पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित और अराजपत्रित पदों पर सीधे नियुक्ति दी जाएगी | 

उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया फैसला

सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अवसर खोलते हुए, अब खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी है। साथ ही परीक्षा केंद्रों तक बस से सफर करके जाने वाले खिलाड़ियों को अब बस के किराए में भी 50 प्रतिशत छूट देने का भी फैसला लिया गया है। दरअसल उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में कैबिनेट के समक्ष कुल 30 बिन्दु आए थे। इन्हीं प्रस्तावों में से एक प्रस्ताव खिलाड़ियों के हित में था। इस प्रस्ताव के तहत सरकार ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर उत्तराखंड का नाम रौशन करने वाले खिलाड़ियों को नौकरी देने का फैसला लिया है। यही नहीं अब खिलाड़ी जब परीक्षा देने के लिए परीक्षा केन्द्र तक बस से जाएंगे, तो बस के किराए में भी उन्हें 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।  

छह विभागों में होगी, खिलाड़ियों की नियुक्ति

कैबिनेट बैठक के बाद संचालित प्रेस वार्ता में मुख्य सचिव डॉ एसएस संधू ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ी अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए अब तक अन्य राज्य में पलायन कर रहे हैं। ऐसे में राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए रोजगार के साधन खोलते हुए अब मंत्रिमंडल ने 2000 से लेकर 5400 ग्रेड वेतनमान के पदों पर खिलाड़ियों को नौकरी देने का फैसला किया है। इन खिलाड़ियों को युवा कल्याण, खेल, माध्यमिक शिक्षा, वन और परिवहन में नियुक्तियां दी जाएगी। साथ ही प्रदेश में खेल नीति 2021 के अंतर्गत यह व्यवस्था 1 जनवरी  2013 से लागू होनी सुनिश्चित की गई है। जिससे 1 जनवरी 2013 के बाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले सभी खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। यही नहीं प्रदेश में ही रोजगार के साधन मिलने के बाद अब खिलाड़ियों को नौकरी के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख भी नहीं करना पड़ेगा।

 

 

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