मणिपुर हिंसा पर SC ने कहा-सुनवाई करना हीलिंग प्रोसेस का हिस्सा, हम ‘जनता की अदालत’ हैं

पीटीआई: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिंसा प्रभावित मणिपुर में बार के सदस्यों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी वकील को राज्य में अदालती कार्यवाही से वंचित न किया जाए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि हम ‘जनता की अदालत’ हैं और सुनवाई करना हीलिंग प्रोसेस का हिस्सा है।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मणिपुर राज्य वहां के हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य के सभी नौ न्यायिक जिलों में वीडियो कान्फ्रेंस सुविधाएं स्थापित की जाएं ताकि डिजिटल माध्यम से हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने के इच्छुक वकील या वादी न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने में सक्षम हों।

पीठ की ओर से यह निर्देश तब आया जब आरोप लगाया गया कि एक विशेष समुदाय के वकीलों को वहां हाई कोर्ट में पेश होने की अनुमति नहीं दी जा रही। पीठ में जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल थे। शीर्ष अदालत ने मामले में पेश होने वाले वकीलों से यह भी कहा कि वे अदालत में किसी भी समुदाय के विरुद्ध ‘कीचड़ उछालना’ बंद करें।

पीठ कई याचिकाओं पर दलीलें सुन रही थी, जिनमें राहत और पुनर्वास उपायों के अलावा हिंसा के मामलों की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध किया गया है। पीठ ने सुनवाई में उपस्थित मणिपुर हाई कोर्ट बार के अध्यक्ष से पूछा, ‘क्या किसी समुदाय के वकीलों को हाई कोर्ट में पेश होने से रोका गया है?’

बार अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक वकील को अदालत में आने की अनुमति है और वे प्रत्यक्ष रूप से या डिजिटल माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं। पीठ ने कहा, ‘अगली बार हमारे सामने ऐसे आदेशों का एक संकलन पेश करें जो दर्शाता हो कि सभी समुदायों के वकील हाई कोर्ट के समक्ष पेश हुए हैं।’

‘यूआइडीएआइ व राज्य सरकार मणिपुर के विस्थापितों को आधार कार्ड मुहैया कराएं’

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) और मणिपुर सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य में खूनी जातीय संघर्ष में विस्थापित हुए उन लोगों को ‘आधार’ कार्ड मुहैया कराया जाए, जिनके रिकार्ड यूआइडीएआइ के पास उपलब्ध हैं। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड शीघ्रता से जारी करने से पहले आवश्यक सत्यापन किया जाए।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यूआइडीएआइ विस्थापित लोगों के आधार कार्ड खोने के दावों का सत्यापन करेगा। जिन लोगों को पहले आधार कार्ड जारी किया जा चुका है उनका बायोमेट्रिक विवरण प्राधिकरण के पास होगा। शीर्ष कोर्ट ने दस्तावेज खो चुके लोगों के बैंक खातों के विवरण उपलब्ध कराने के लिए मणिपुर के वित्त विभाग को राज्य के प्रभावित हिस्सों में सभी बैंकों को इस बारे में उपयुक्त निर्देश जारी करने को कहा।

पीठ ने कहा कि मणिपुर के स्वास्थ्य विभाग के सचिव राहत शिविरों में दिव्यांगता प्रमाणपत्र/ दिव्यांग्ता प्रमाणपत्रों की नकल (प्रति) विशेष जरूरतों वाले लोगों को जारी करने के लिए शीघ्रता से कदम उठाएं। पीठ ने शीर्ष कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा दाखिल रिपोर्ट पर विचार करते हुए ये निर्देश जारी किए।

समिति की सभी सदस्य महिला हैं और हाई कोर्टों की पूर्व न्यायाधीश हैं। इसमें जस्टिस (सेवानिवृत्त) शालिनी पी. जोशी और जस्टिस (सेवानिवृत्त) आशा मेनन भी शामिल हैं। शीर्ष न्यायालय में दाखिल रिपोर्ट में समिति ने विस्थापितों के खो चुके निजी दस्तावेजों सहित अन्य मुद्दों पर कुछ खास निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। पीठ ने इस दौरान यह भी टिप्पण की हम सुप्रीम कोर्ट में मणिपुर सरकार नहीं चला सकते। अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी।

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