राज्य के संभावित आपदा क्षेत्रों के चिन्हीकरण हेतु जिला स्तरीय समिति बनाने की कवायद शुरू

जोशीमठ भूधंसाव की घटना के बाद अब  प्रदेश सरकार राज्य के पर्वतीय जनपदों में संभावित आपदा क्षेत्रों में अवस्थित आवासीय भवनों  के चिन्हीकरण के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय समिति बनाने पर विचार कर रही है। जो अपने जिलों में स्थानीय सर्वे के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट राज्य  सरकार को प्रस्तुत करेंगे|  समिति में जिलाधिकारी के अतिरिक्त उप जिलाधिकारी, लोक निर्माण विभाग, सिचाई विभाग, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के अधिकारियों को शामिल किया जायेगा | 

आवास मंत्री डा. प्रेमचंद्र अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि धामी सरकार जोशीमठ आपदा के बाद राज्य के सभी जनपदों में वर्तमान में निर्मित ऐसे भवन जों भूकंप, भू-स्खलन, भू-धंसाव, अतिवृष्टि आदि की दृष्टि से जोखिम भरे भवनों की श्रेणी में आते हैं। उन्हें चिन्हित कर सुरक्षित करने को मानक संचालन प्रक्रिया संबंधी प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि समस्त जनपदों में भूकंप, भू-स्खलन, भू-धंसाव, अतिवृष्टि आदि जोखिम संभावित भवनों के चिन्हिकरण कर सुरक्षित करने को सात सदस्यीय समिति बनाने पर विचार कर रही है। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी इस समिति की अध्यक्षता करेंगे, जबकि अन्य छह इसके सदस्य रहेंगे।

साथ ही उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के अलावा इन 6 सदस्यों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अथवा सचिव, संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी, लोकनिर्माण विभाग अथवा सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता, सहायक भू-वैज्ञानिक (भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग), आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि और संबंधित नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी रहेंगे। साथ ही इन सात सदस्यीय समिति में आवश्यकतानुसार कोई भी संबंधित विशेषज्ञ को आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा यह समिति प्रत्येक जनपद में ऐसे निर्मित भवन जो जोखिम संभावित भवनों की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 30 डिग्री से अधिक ढाल पर निर्मित भवन, नदियों के अंतर्गत अथवा फ्लड जोन के अंतर्गत निर्मित भवन आदि ऐसे समस्त भवन जो असुरक्षित हों।

आवास मंत्री डा. प्रेमचंद्र अग्रवाल ने बताया कि ऐसे असुरक्षित भवनों का भी चिन्हिकरण किया जाएगा, जिन्हें रेट्रोफिटिंग द्वारा सुरक्षित किया जा सकता है। बताया कि समिति इनके चिन्हिकरण के बाद आपदा न्यूनीकरण भवनों को सुरक्षित किये जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगी

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