आतंकवाद के मुद्दे पर एक सुर में वैश्विक नेताओं ने जताई चिंता, पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दिया जोर

एएनआई। दिल्ली में नौवें P-20 शिखर सम्मेलन को PM मोदी ने शुक्रवार (13 अक्टूबर) को संबोधित किया। इसमें कई वैश्विक नेताओं ने दुनियाभर में फैले आतंकवाद के मुद्दे पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खतरे से लड़ने के लिए सभी देशों को एक साथ आने की जरूरत है।

वैश्विक नेताओं ने P-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की भी सराहना की है। यहां पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर जोर दिया और भारत के खिलाफ आतंकवादी घटनाओं को याद किया।

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आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या- रूसी सांसद

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए रूसी सांसद प्योत्र टॉल्स्टॉय ने कहा, “आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या है। मुझे लगता है कि दुनिया की संसदों को आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत घोषणा की जरूरत है। यह लाखों करोड़ों लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

नाइजीरिया के महासचिव सालेह अबुबकर ने भी आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई और इसे ‘वैश्विक मुद्दा’ बताया। अबुबकर ने कहा कि सभी देशों को शांति हासिल करने के लिए काम करने की जरूरत है।

हमें एक परिवार के रूप में मिलकर काम करने की जरूरत- अबुबकर

सालेह अबुबकर ने कहा, “आतंकवाद का मुद्दा एक वैश्विक मुद्दा है। यह कुछ ऐसा है जिसके लिए पूरी दुनिया को सामने आना चाहिए और इसका समाधान खोजना चाहिए। जिस तरह से वह (पीएम मोदी) इसे इस आदर्श वाक्य – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य- के साथ ले रहे हैं। अगर सभी नेता एक साथ आएं और कहें कि हम सब एक हैं और हमें एक परिवार के रूप में मिलकर काम करने की जरूरत है, तो यह सब बंद हो जाएगा।”

महिला आरक्षण विधेयक की भी हुई तारीफ

नाइजीरियाई महासचिव ने कहा, “जब तक शांति नहीं होगी तब तक दुनिया एक परिवार के रूप में आगे नहीं बढ़ सकती। सबकुछ शांति पर केंद्रित है और हम सभी को इसी पर काम करना चाहिए।” सालेह अबुबकर ने भारत की संसद में पास किए गए महिला आरक्षण विधेयक की भी तारीफ करते हुए एसे एक बड़ी उपलब्धि बताया।

इससे पहले रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने भी पीएम मोदी के संबोधन की सराहना की थी और कहा था कि दुनिया में शांति सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में ये देश रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में इंडोनेशिया, मैक्सिको, सऊदी अरब, ओमान, स्पेन, यूरोपीय संसद, इटली, दक्षिण अफ्रीका, रूस, तुर्किये, नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, जापान, मिस्र और बांग्लादेश के वक्ता और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मौजूद थे।

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