दो से पांच लाख साल पहले यहां मानव ने पत्थरों पर बनाए चित्र…

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मंदसौर: शैल चित्र कला के विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में भानपुर के पास ‘दर की चट्टान’ के शैल चित्र (कपमार्क्‍स) दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात शैल चित्र हैं और ये दो से पांच लाख वर्ष पुराने हैं.

दुनिया से सबसे पुराने शैल चित्र के काल की गणना के लिए वैज्ञानिकों ने मंदसौर जिले की ‘दर की चट्टान’ में दो नवंबर से 23 नवंबर 2016 तक एक सफल अभियान पूरा किया है. इस अभियान का नेतृत्व ‘रॉक सोसायटी ऑफ इंडिया’ के महासचिव प्रोफेसर गिरीराज कुमार और आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक राबर्ट जी बेडनारिक ने संयुक्त रूप से किया.

कुमार ने बताया कि बेडनारिक शैल कला क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक हैं तथा ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रॉक आर्ट ऑर्गनाइजेशन’ (आईएफआरएओ) के संयोजक भी हैं.

आगरा के दयालबाग शैक्षणिक संस्थान के कला संकाय में रॉक आर्ट साइंस के प्रोफेसर कुमार ने दावा किया, ‘‘हमारे शोध के अनुसार मंदसौर जिले में भानपुर के पास ‘दर की चट्टान’ की शैल-कला दुनिया में पाए गए अब तक के सबसे पुराने हैं. यह लगभग दो से पांच लाख वर्ष पुराने हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में वर्ष 2002 में शुरू किए गए अनुसंधान के दौरान हमें ‘दर की चट्टान’ में गुफा की एक दीवार पर 530 से अधिक ‘कप मार्क्‍स’ मिले. इसके साथ ही हमें इस क्षेत्र में अनुसंधान के दौरान पांच लाख साल पुराने हथौड़े भी मिले हैं.’’


कुमार ने इस अभियान की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘अभियान के तहत मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में जमीनी स्तर पर कार्य हाल ही में संपन्न हुआ है. इस अभियान का उद्देश्य ‘दर की चट्टान’ में पाए गए शैल चित्रों के काल खंड की गणना करना है. इसके लिए यहां से नमूने और संबंधित तथ्य एकत्रित किए गए हैं. दर की चट्टानों के शैल चित्रों की विशेषता यह है यह दुनिया में ज्ञात सबसे पुराने एवं भारत में पाई गई रॉक आर्ट की दो जगहों में से एक है.’’ उन्होंने बताया कि इस जटिल अभियान की सफलता के लिए इस प्रोजेक्ट में भारत, आस्ट्रेलिया एवं यूरोप से कई शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है. इन शैल चित्रों में से एक क्वार्टजाइट गुफा में पेटरोग्लिफ शामिल हैं. कुछ साल से यह चर्चा थी कि ये दुनिया में पाए गए सबसे पुराने शैल चित्र हैं लेकिन अब तक वैज्ञानिकों ने इनके बारे में यह नहीं बताया था कि ये कितने साल पुराने हैं.


विश्व की इस प्राचीन एवं अद्वितीय कला के संरक्षण के प्रति चिंतित कुमार ने कहा कि पुरातत्व साक्ष्यों के लिहाज से यह क्षेत्र काफी समृद्ध है. उन्होंने इसके भविष्य प्रति जिला कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह, और क्षेत्रीय विधायक चंदर सिंह सिसौदिया से भी विचार विमर्श किया.

 

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