क्रिएटिव लोगों के लिए क्रिएटिव दफ्तर

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ज्यादातर दफ्तरों में मशीनें और कंप्यूटर एक जैसे होते हैं. फर्क होता है तो कर्मचारियों का. अच्छे और क्रिएटिव लोग कंपनी को ऊंचाइयों पर ले जाते हैं. माहौल भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है.

कभी टेबल टेनिस तो कभी बिलियर्ड. उसके बाद फिटनेस स्टूडियो और अंत में कॉफी पीते हुए दफ्तर. अच्छे कर्मचारियों को बांधे रखने के लिए कंपनियां तरह तरह के उपाय कर रही हैं. खासकर क्रिएटिव फील्ड में काम कर रही कंपनियां, जो अपने कर्मचारियों के आयडियाज पर निर्भर हैं, उन्हें रचनात्मक माहौल भी मुहैया कराना होगा. बहुत सी स्टार्ट अप कंपनियां शेयर्ड ऑफिसेज में काम करती हैं. सवाल ये है कि दफ्तर में कौन सी चीज लोगों को क्रिएटिव बनाती है? कैसा माहौल उन्हें मोटिवेट करता है? फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट में हम ऐसे वैज्ञानिकों से मिलते हैं, जिन्होंने इस पर रिसर्च किया है. फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के श्टेफान रीफ कहते हैं, “आप बाहर जा सकें, कुछ नया देख सकें, नये लोगों से मिल सकें. हम देख सकते थे कि काम की जगह से 10 से 15 प्रतिशत समय बाहर रहने पर  सचमुच आयडियाज बढ़ने लगते हैं, जिन्हें हम बाहर से लाते हैं.”

इंस्टीट्यूट के कमरों को खास तरीके से सजाया गया है. ये रिसर्च के नतीजों के मुताबिक आदर्श हैं. हर मंजिल एक खुली सीढ़ी से जुड़ी है. इसका मकसद लोगों के बीच संवाद बढ़ाना है. लेकिन जो एकाग्र हो कर काम करना चाहता है वह एकांत में जा सकता है. रूम डिवाइडर का काम आवाज को कम करना है. यहां किसी का कोई पक्की टेबल नहीं है. हर कोई रोज अपने लिये नई जगह चुन लेता है. बहुत सारा बदलाव जरूरी है और दफ्तर का माहौल जरूरत के हिसाब से होना चाहिए.

उन उद्यमों के लिए जो अपना दफ्तर वैज्ञानिक जानकारियों के हिसाब से रखना चाहते हैं, एक 3-डी सॉफ्टवेयर बनाया गया है. इसकी मदद से कमरे को वर्चुअली देखा जा सकता है. इस तरह आप पहले से ही देख सकते हैं कि कमरे में क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं. माइक्रोसॉफ्ट ने अपना जर्मन हेडक्वार्टर फ्राउनहोफर के सहयोग से सजाया है. यहां रोशनी का असर भी परखा जाता है. इस कॉन्फ्रेंस रूम में दिन की रोशनी सिमुलेट की जा सकती है, और सूर्यास्त की लालिमा भी.

काम की दुनिया बदल रही है. इसे अब बड़ी कंपनियां भी समझने लगी हैं. जैसे कि स्पोर्ट आर्टिकल बनाने वाली कंपनी पूमा. यहां कर्मचारियों की औसत आयु 33 साल है. दुनिया भर के युवा लोग यहां जर्मन देहात में काम करने आते हैं, काम के अनौपचारिक माहौल के कारण.

नये कमरे डिजायनरों के साथ मिलकर सजाये गये हैं. सीधे सादे कमरे रचनात्मक काम में मदद देते हैं. कर्मचारी चुन सकते हैं कि वे हमेशा एक ही जगह बैठना चाहते हैं या अलग अलग जगह. एचआर हेड ने उनसे पूछा कि उन्हें खुला दफ्तर कैसा लगता है, क्योंकि उन्हें एक कमरे वाला दफ्तर छोड़ना होगा. पूमा के जनसंपर्क अधिकारी डीटमार क्नॉस कहते हैं, “दरअसल आम तौर पर दो चीजों की बात होती है, बाहरी आंखों से सुरक्षा और शोर से सुरक्षा. और यदि हम इन कदमों को ठीक से लागू करें तो सकारात्मक प्रतिक्रिया भी होती है, जैसा कि ओपन ऑफिस कंसेप्ट के साथ है.

पूमा के दफ्तर में टेबल किकर भी है, जिसका इस्तेमाल लंच ब्रेक में होता है. बड़ी कंपनियों ने इसे स्टार्ट अप कंपनियों से कॉपी किया है. हम एक साउंड प्रूफ कमरे को टेस्ट करते हैं, बहुत ज्यादा टेलिफोन करने वालों के लिए. और उसके बाद एक ब्रेक. कर्मचारी हर दिन कई घंटे दफ्तर में बिताते हैं, ऐसे में उनका मानसिक रूप से तरो ताजा रहना बेहद जरूरी है.

 

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