उत्तराखंड में भी मौजूद हैं हिम तेंदुए

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उत्तराखंड में दुर्लभ हिम तेंदुए की मौजूदगी हमेशा से उत्सुकता का विषय रहा है, लेकिन विश्व प्रकृति निधि (डब्लूडब्लूएफ) के सर्वे ने उम्मीद की एक किरण जगाई है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में किए गए एक सर्वेक्षण में इस बात की पुष्टि हुई है कि हिम तेंदुआ अपने पूरे दमखम के साथ उत्तराखंड में मौजूद है। सर्वेक्षण से पता चला है कि 3190 से 4115 मीटर तक ऊंचेक्षेत्रों में हर 39 किलोमीटर पर एक हिम तेंदुआ रहता है।
समुद्रतल से 3000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर दुर्लभ हिम तेंदुआ पाया जाता है। दुर्लभ प्रजाति होने के कारण इसे इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) की संकट ग्रस्त जातियों की सूची में शामिल किया गया है।

उत्तराखंड और हिमाचल के 3000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के 10 संरक्षित क्षेत्रों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया। सर्वेक्षण के दौरान 3190 से 4115 मीटर ऊंचाई के क्षेत्रों में हिम तेंदुए के मल, पंजों के निशान पाए गए है, जिनसे पता चलता है कि उत्तराखंड के इन क्षेत्रों में हर 39 किलोमीटर के दायरे में एक हिम तेंदुआ रहता है। 39 प्रतिशत सबूत हिमालय की ढालों पर, 30 प्रतिशत घाटियों की तलहटी में, 11 प्रतिशत कगारों (धार) और आठ प्रतिशत गाड़-गधेरों व कम ढलान वाले क्षेत्रों में मिले हैं।

गंगोत्री नेशनल पार्क, अस्कोट वन्यजीव अभ्यारण, नंदादेवी बायोस्फेयर रिजर्व, गोविंद पशु विहार, पिथौरागढ़-मुनस्यारी का डंग वनक्षेत्र हिम तेंदुए की बसासत के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र साबित हो सकते हैं।

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